Posts

Showing posts from April, 2025

"धर्म नहीं, दिल जोड़ो")

 "26 मासूम ज़िंदगियाँ चली गईं… कोई हिंदू था, कोई मुसलमान… मगर मौत ने किसी का मजहब नहीं पूछा। आज भी हम आपस में लड़ते हैं, एक-दूसरे को दोष देते हैं, मगर सवाल ये है — क्या इंसान होना काफी नहीं? क्या अब भी हम नहीं समझेंगे कि अगर हम साथ नहीं आए, तो नफरत हम सबको मिटा देगी? अब समय आ गया है कि हम मिलकर सिर्फ एक ही धर्म को माने — इंसानियत का।" -(मूल बातें): 1. मौत मजहब नहीं देखती: जब किसी का अपना चला जाता है, तो वो ये नहीं पूछता कि सामने वाला कौन से धर्म का है। दर्द सबका एक-सा होता है। 2. हिंदू-मुस्लिम साथ आएं: अब वक्त है कि हम दीवारें गिराएं, दिल मिलाएं। नफरत फैलाने वालों को जवाब दें अपने प्यार से। एक-दूसरे के त्योहार मनाएं, एक-दूसरे का दर्द समझें। 3. इंसान पहले, बाकी बाद में: पहले हम इंसान हैं, फिर हिंदू या मुसलमान। मोहब्बत का हाथ बढ़ाओ, नफरत की दीवारें खुद-ब-खुद गिर जाएंगी। 4. यही है असली देशभक्ति: देश तभी मजबूत होगा जब इसके लोग आपस में जुड़े रहेंगे। अगर हम एक-दूसरे से लड़ते रहेंगे, तो दुश्मन को हमें तोड़ने में वक्त नहीं लगेगा। 5. आओ एक वादा करें: आज से हर इंसान को इंसान समझेंगे। क...